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भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने लिए सोमवार का व्रत जानिये कैसे करते हैं,

भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने लिए सोमवार का व्रत जानिये कैसे करते हैं,

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पढ़ें सोमवार की कथा सोमवार को भगवान शंकर की पूजा होती है  जानिये कैसे करते हैं सोमवार का व्रत, पढ़ें सोमवार की कथा सोमवार व्रत की विधि और कथा सोमवार व्रत भगवान शिव को समर्पित है. त्रिदेवों में से एक भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सोमवार का व्रत किया जाता है. माता जाता है कि सोलह सोमवार का व्रत पूरे विधि विधान के साथ करने से मन की सारी इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं

सोमवार व्रत विधि

  • नारद पुराण के अनुसार सोमवार व्रत में व्यक्ति को प्रात: स्नान कर शिव जी को जल चढ़ाना चाहिए.
  • इसके बाद शिव गौरी की पूजा करनी चाहिए. शिव पूजन के बाद सोमवार व्रत कथा सुननी चाहिए.
  • सोमवार व्रत में सिर्फ एक समय ही भोजन करना चाहिएtop astrologer in Gurgaon, famous astrologer in Gurgaon,
  • सोमवार का व्रत दिन के तीसरे पहर तक होता है. यानी शाम तक यह व्रत रखा जाता है.
  • सोमवार व्रत हो या सोलह सोमवार व्रत या सौम्य प्रदोष व्रत. सभी व्रत को करने की विधि एक ही होती है.
  • शाम को खाने में कोशिश करें कि नमक ना खाएंtop astrologers in delhi, best career astrologer in delhi, shastri,
  • सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में सोकर उठें। acharya, acharya v shastri, v acharya,
  • पूरे घर की सफाई कर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं।
  • गंगा जल या पवित्र जल पूरे घर में छिड़कें।
  • घर में ही किसी पवित्र स्थान पर भगवान शिव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

पूजन तैयारी के बाद निम्न मंत्र से संकल्प लें

'मम क्षेमस्थैर्यविजयारोग्यैश्वर्याभिवृद्धयर्थं सोमवार व्रतं करिष्ये'

इसके पश्चात निम्न मंत्र से ध्यान करें

'ध्यायेन्नित्यंमहेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलांग परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्

पद्मासीनं समंतात्स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं विश्वाद्यं विश्ववंद्यं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्'

ध्यान के पश्चात ' नमः शिवाय' से शिवजी का तथा ' नमः शिवाय' से पार्वतीजी का षोडशोपचार पूजन करें।

  • पूजन के पश्चात व्रत कथा सुनें।
  • तत्पश्चात आरती कर प्रसाद वितरण करें।
  • इसके बाद भोजन या फलाहार ग्रहण करें।

सोमवार व्रत का फल :

अग्नि पुराण के अनुसार चित्रा नक्षत्रयुक्त सोमवार से लगातार सात व्रत करने पर व्यक्ति को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है. इसके अलावा सोलह सोमवार का व्रत करने से मनवांछित वर प्राप्त होता हैbest astrologer in Dwarka delhi, astrologer in delhi ncr,

सोलह सोमवार व्रत अविवाहित कन्याओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण और प्रभावशाली माना जाता है.

सोमवार व्रत आरती:

जय शिव ओंकारा जय शिव ओंकारा |

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्दाडी धारा | टेक

एकानन, चतुरानन, पंचानन राजे |

हंसानन गरुडासन बर्षवाहन साजै | जय...

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अते सोहै |

तीनो रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहै | जय...

अक्षयमाला वन माला मुंड माला धारी |

त्रिपुरारी कंसारी वर माला धारो |जय...

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे |

सनकादिक ब्रह्मादिक भूतादिक संगे जय...

कर मे श्रेष्ठ कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता

जग - कर्ता जग - हर्ता जग पालन कर्ता। जय...

ब्रह्मा विष्णु सदा शिव जानत अविवेका

प्रणवाक्षर के मध्य ये तीनो एका | जय

त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई गावे |

कहत शिवानन्द स्वामी सुख सम्पति पावे | जय...

सोमवार व्रत कथा:

एक नगर में एक साहूकार रहता था. उसके पास धन कमी नहीं थी. पर उसकी कोई संतान नहीं थी. वह बहुत दुखी था. वह प्रत्येक सोमवार व्रत रखता था और शिव पार्वती जी की पूजा करता था.

मां पार्वती उसकी भक्ति से प्रसन्न हो गईं. भगवान शिव से उन्होंने उस साहूकार की मनोकामना पूर्ण करने का आग्रह किया. भगवान शिव ने कहा कि हे पार्वती, साहूकार के भाग्य में यही लिखा है. पर पार्वती जी नहीं मानी और भगवान शंकर से साहूकार की भक्ति का मान रखने का आग्रह करने लगीं.

शिवजी ने साहूकार को पुत्र-प्राप्ति का वरदान दे दिया. लेकिन उसके बालक को सिर्फ बारह वर्ष की आयु ही दी. इस बात पर साहूकार ना तो खुश हुआ और ना दुखी. पर उसने भगवान शंकर की पूजा करनी नहीं छोड़ी. वह पहले की ही तरह पूजा करता रहा. साहूकार के घर पुत्र का जन्म हुआ.

वह जब 11 साल का हो गया तो साहूकार ने उसे काशी शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेज दिया. अपने पुत्र को उसके मामा के साथ काशी भेज दिया गया. साहूकार ने अपने पुत्र को धन भी दिया और कहा कि मार्ग में यज्ञ कराना. जहां भी यज्ञ कराओ वहां ब्राह्मणों को भोजन कराते और दक्षिणा देते हुए जाना |

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